बुद्ध के तीन सवाल में छुपा हैं जीवन का रहस्य ।

एक बार बुद्ध एक नगर के बाजार से गुजर रहे थे। तभी एक व्यक्ति उनके पास आया और बुद्ध को वंदन करते हुए बोला कि भगवान यहाँ का नगर सेठ आपकी निंदा करते हुए आपको कुछ बोल रहा था। अगर आज्ञा हो तो बताऊ की वह आपके लिए क्या बोल रहा था।

तब बुद्ध ने कहा की पहले मेरे तीन सवालो का जवाब दो फिर आगे देखते हैं कि नगर सेठ की बाते सुनना हैं या नहीं।

बुद्ध ने व्यक्ति से कहा- क्या तुम्हे लगता हैं कि नगर सेठ मेरे बारे में जो बाते बोला वो सत्य हैं?

तब व्यक्ति ने कहा- नहीं भगवन् मुझे तो उसकी बातो में तनिक भी भरोसा नहीं हैं। उसने बोला इसलिए मैं आपको बताना चाह रहा था।

बुद्ध ने दूसरा प्रश्न किया- क्या तुम्हे लगता हैं कि जिस बात को तुम बताने जा रहे हो उसे सुनकर मुझे दुःख होगा?

तब व्यक्ति ने कहा- हां भगवन् उसे सुनकर दुःख हो सकता हैं।

तब बुद्ध ने अंतिम प्रश्न किया- क्या तुम्हे लगता हैं जो बाते तुम मुझे बताओगे वह मेरे किसी काम की हैं या उससे मुझे कोई लाभ होगा

व्यक्ति ने जवाब दिया- नहीं भगवन् ये बातें न ही आपके किसी काम की हैं न ही आपको कोई लाभ होगा।

तब बुद्ध ने कहा- “मेरा हृदय एक शांत सरोवर हैं जिसमे मैं प्रेम दया करुणा के पुष्प रखता हूँ। जिस बात पर तुम्हे ही यकीन नहीं हैं, जिस बात को सुनकर मुझे दुःख हो और जो बात मेरे किसी काम की नहीं हैं अर्थात व्यर्थ हैं। ऐसी बातो को सुनकर मैं अपने शांत सरोवर रुपी हृदय को क्यूं मलीन करू”।

व्यक्ति को ज्ञान मिल चुका था कि किसी दूसरे की बात को सुन कर ही विश्वास कर लेना काफी नहीं हैं बल्कि स्वयं का विवेक जगाकर ऐसी निंदाजनक बातो से दूर रहना ही बेहतर हैं।

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ईश्वर स्वरुप चिकित्सक Dr. T.K. Lahri

ईश्वर स्वरुप चिकित्सक Dr. T.K. Lahri – जिसे हॉस्पिटल आते देख लोग अपनी घड़ी की टाइमिंग सही करते है !

जिस दौर में लाशों को भी वेंटीलेटर पर रखकर बिल भुनाने से कई डॉक्टर नहीं चूकते, उस दौर में इस देवतुल्य चिकित्सक की कहानी दिल को गदगद कर देती है। जब तमाम डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़ प्राइवेट प्रैक्टिस से करोड़ों का अस्पताल खोलना फायदमंद समझते हैं, तब बीएचयू के प्रख्यात कार्डियोलाजिस्ट पद्मश्री प्रो. डॉ. टी के लहरी साहब अद्भुत हैं।

आप हैरत में पड़ेंगे। मेडिकल कॉलेज में तीन दशक की प्रोफेसरी में पढ़ा-लिखाकर सैकड़ों डॉक्टर तैयार करने वाले लहरी साहब के पास खुद का चारपहिया वाहन नहीं है। आज जब तमाम डॉक्टर चमक-दमक। ऐशोआराम की जिंदगी जीते हैं। लंबी-लंबी मंहगी कारों से चलते हैं। चंद कमीशन के लिए दवा कंपनियों और पैथालॉजी सेंटर से सांठ-गांठ करने में ऊर्जा खपाते हैं। नोटों के लिए दौड़-भाग करते हैं। तब प्रो. लहरी साहब आज भी अपने आवास से अस्पताल तक पैदल ही आते जाते है।

मरीजों के लिए किसी देवता से कम नहीं हैं। उनकी बदौलत आज लाखों गरीब मरीजों का दिल धड़क रहा है, जो पैसे के अभाव में महंगा इलाज कराने में लाचार थे। गंभीर हृदयरोगों का शिकार होकर जब तमाम गरीब मौत के मुंह में समा रहे थे। तब डॉ. लहरी ने फरिश्ता बनकर उन्हें बचाया।

प्रो. टीके लहरी बीएचयू से 2003 में ही रिटायर हो चुके हैं। चाहते तो बाकी साथियों की तरह बनारस या देश के किसी कोने में आलीशान हास्पिटल खोलकर करोड़ों की नोट हलोरने लगते। मगर खुद को नौकरी से रिटायर माना चिकित्सकीय सेवा से नहीं।

रिटायर होने के बाद 15 साल बाद भी बीएचयू को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वो भी पूरी तरह मुफ्त।

आप यह जानकर सिर झुका लेंगे। सोचेंगे कि चरण मिल जाएं तो छू लूं। जब पता चलेगा कि प्रो. लहरी साहब पेंशन से सिर्फ अपने भोजन का पैसा रखते हैं, बाकी बीएचयू को दान दे देते हैं। ताकि महामना का यह संस्थान उस पैसों से गरीबों की खिदमत कर सके।

इस महान विभूति की गाथा यहीं नहीं खत्म होती। समय के पाबंद लोगों के लिए भी प्रो. लहरी मिसाल हैं। 75 साल की उम्र में भी वक्त के इतने पाबंद हैं कि उन्हें देखकर बीएचयू के लोग अपनी घड़ी की सूइयां मिलाते हैं। वे हर रोज नियत समय पर बीएचयू आते हैं और जाते हैं। प्रो. लहरी साहब को देखकर बीएचयू का स्टाफ समझ जाता है कि इस वक्त समय घड़ी की सूइयां कहां पर पर होंगी।

उनके अदम्य सेवाभाव और मरीजों के प्रति प्रेम को देखते हुए बीएचयू ने उन्हें इमेरिटस प्रोफेसर का दर्जा दिया हुआ है। यूं तो इस विभूति को बहुत पहले ही पद्मश्री जैसे सम्मान मिल जाने चाहिए थे। मगर देर से ही सही, पिछले साल पूरी काशीनगरी तब खुशी से झूम उठी थी, जब इस महान विभूति को 26 जनवरी 2016 को केंद्र सरकार ने पद्मश्री से नवाजा। लाखों मरीजों का दिल धड़काने वाले प्रो. लहरी को मिले सम्मान से पद्मश्री का भी गौरव बढ़ता नजर आया। और हां लहरी साहब को देखकर सवाल का जवाब भी मिल गया- डॉक्टरों को भगवान का दर्जा क्यों दिया गया है।

उम्मीद है कि डॉ. लहरी साहब के इस देवतुल्य कार्य के बारे में जानकर उन तमाम डॉक्टरों का जमीर जरूर जागेगा, जिनके लिए चिकित्सा धर्म से धंधा बन चुका है।

मेरा हमेशा से मानना रहा है। धरती पर बुरे लोगों से कहीं ज्यादा अच्छे लोग हैं। तभी दुनिया चल रही है। यही वजह है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी। जरूरत है हमें अपने बीच ऐसी शख्सियतों को ढूंढकर सम्मान देने की।

सोर्स फेसबुक

एम् एम् एच कॉलेज की डॉ मधु गुप्ता को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड 

गाजियाबाद के एमएमएच कॉलेज की रसायन विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ, मधु गुप्ता को कोयंबटूर की नफेड सस्था द्वारा शिक्षक दिवस २०१८ पर लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया, डॉ. गुप्ता इस समारोह में मुख्यअतिथि भी थी, इनको यह अवार्ड इनके शिक्षण कार्य, रसायन विज्ञानं में उत्कृष्ट शोधकार्य एवं प्रकाशन हेतु दिया गया |

नेशनल फाउंडेशन ऑफ़ एंटरप्रेनर्स डेवलपमेंट (नफेड) के चेयरमैन क्रांतिवीर डॉ. गणेशन रामास्वामी ने देश भर से आये शोधार्थियों के समक्ष डॉ. गुप्ता के अनेको शोध पत्रों की भूरी भूरी प्रसंसा की वही डॉ. मधु गुप्ता ने कहा की इस अवार्ड से वह बहुत खुश है और आगे भी उनकी शोध सेवाएं जारी रहेंगी |

देश भर से आये शोध पत्रों की एक रिसर्च बुक का भी अनावरण हुआ जिसमे मॉडर्न कॉलेज ऑफ़ प्रोफेशनल स्टडीज, गाजियाबाद की शिक्षिका डॉ किरण जोशी का भी लेख प्रकाशित किया गया है

पोर्टल न्यूज़

https://www.nationaltvindia.com/state-news/dr-madhu-gupta-honored-with-life-time-achievement-award/

मदभागवत गीता 5000 वर्ष पूर्व दो मित्रों की एक ऐसी बातचीत जो आज भी जीवन के लिए सुगम मार्ग और अकाट्य है ।

आज से 5000 वर्ष पहले दो मित्रों (अर्जुन और कृष्ण) ने ब्रह्मांड के जीव और जीवन से जुड़े अनंत युग तक प्रयोग होने वाले समाधानो को अपने प्रश्न और उत्तर के माध्यम से गीता में दे गए, जो आज दुनिया के प्रत्येक उपलब्ध भाषाओं में लिपिबद्ध है। जिन्हें आप नर और नारायण कहते हैं ।

वासुदेव कृष्ण का जन्मदिन सही अर्थों में उनके दिव्यज्ञान का रसपान हैं । गीता के अनुसार किये आप के कर्म ही उनके जन्मदिवस की सच्ची भक्ति और समर्पण भाव है ।

आप भी गीता पढ़ें और पढ़ाये साथ ही ऐसी मित्रता कायम करें जो स्वार्थ और अधर्म से आपको बचा सके।

।।ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।।