शिक्षा और उसकी गुणवत्ता की सुधार हेतु

श्री अखिलेश यादव

मा. मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश सरकार

लखनऊ, उ. प्र.

दिनांक : 12.01.2015

विषय: शिक्षा और उसकी गुणवत्ता की सुधार हेतु।

महोदय,

निवेदन इस प्रकार हैं की प्रदेश में शिक्षा की व्यवस्था का स्तर दिन प्रति दिन सरकारी स्कूलों में गिरती ही जा रही है । आप अपने प्रयासों से अच्छे शिक्षक और अच्छी तनख्वाह और सुबिधायें तो देते है परन्तु ये शिक्षक ना ही अच्छे विधार्थियों को पढ़ा पाते है ना ही उनसे मिल ही पाते है ।

इसका सीधा कारण है की सरकारी स्कूलों की दिशा दशा इतनी बद्तर है की कोई भी सरकारी कर्मचारी या उस क्षेत्र का थोड़ा भी घनी परिवार, यहां तक की उस स्कूल में पढ़ाने वाला शिक्षक भी अपने सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को दाखिला नही करवाता वहीं वह किसी निजी स्कूलों में दाखिला करवा देता है ।

अब सरकारी स्कूलों में औसतन गिनती के छात्र रह जाते है जो की मजदूरों, किसानो, रिक्शा चालकों, भिखारियों, और गरीबों के बच्चे ही पढ़ने को जाते हैं । उनकी भी दशा ऐसी होती हैं की गिरते पड़ते पांचवी से आठवीं पढ़ते पढ़ाते उनका दम टूट जाता है और वह सड़क पर रेड़ी फेरी लगाने या अपने माता पिता के हाथ बटाने में जुट जाते है । और सरकारी स्कूल का सफ़र यहीं दम तोड़ देता हैं ।

कुछ जो और हौशला कर पाते है वह दसवीं बारहवीं पास करके विश्व विद्यालय में चले जाते है या किसी तकनीकी दुकानदारी मदद में लग कर जीवन यापन करने लगते है । ऐसे में अपवाद स्वरुप कोई आईएएस बन गया तो पूरा श्रेया स्कूल और वहाँ के शिक्षक ले लेता है ।

मोटी मोटी तनख्वाह लेने वाला शिक्षक सिर्फ अपनी तनख्वाह और अपने विषय से इतर हो निजी प्रॉपर्टी का व्यवसाय कोचिंग या नेतागिरी या पंचायत अथवा चुनाव की डियूटी जनगड़ना में समय काट देता हैं ।

अब शिक्षा व्यवस्था को सुचारू रूप से सुधारने की जरूरत हैं । प्रत्येक सरकारी शिक्षक के साथ साथ उक्त जिले में कार्यरत सभी कर्मचारियों की जबाबदेही तय की जाए की सभी सरकारी कर्मचारियों के बच्चे इन्ही सरकारी स्कूलों में पढ़े ताकि उन स्कूलों में शिक्षकों की शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे और उनको अपने ऊपर जिमेदारी का एहसास भी हो। साथ ही साथ समाज में फ़ैल रही असमानता अमाजिकता उंच नीच भेद भाव भी समाप्त हो कर समाज में समाजवाद कायम हो सके।

ऐसा ना करने वालों से उनका कारण अथवा स्पष्टिकरण विद्यालय से सत्यापित करवाया जाए ।

ग्रामीण अंचलों में ग्राम प्रधान की जिमेदारी तय की जाए की उसके ग्राम का प्रत्येक बालक बालिका विद्यालय जरूर जाए यदि कोई छात्र विद्यालय शुल्क की वजह से उसे कोई बाधा आ रही हो तो वह ग्राम प्रधान अपने सरकारी कोष से उस छात्र का शुल्क विद्यालय को जमा करवाये । ऐसी ही व्यवस्था नगरों में पार्षद इत्यादि के माध्यम से हो अथवा सरकार इसके लिए अलग से संगठन बना कर कार्य करें ।

अपने राज्य में शिक्षक भर्ती कर लेना और मोटी तनख्वाह देने के साथ साथ अच्छे छात्र और शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखना भी प्रदेश सरकार का ही काम हैं।

श्री मान जी आशा करता हूँ की इस तथ्य को आप समझेंगे और इस पर गहराई से चिंतन करके इसको प्रदेश में लागू करवाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे ।

धन्यवाद !

आपका नभ्र

राजीव यादव ‪#‎लोकनायक‬

राष्ट्रिय अध्यक्ष

अखिल भारतीय मातृभूमि ट्रस्ट

गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

मोबाइल नॅ: 09971090600

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